सितोपलादि चूर्ण के फायदे-Sitopaladi Churna Benefits in Hindi

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  • सितोपलादि चूर्ण के फायदे | Sitopaladi Churna Benefits in Hindi
  • सितोपलादि चूर्ण क्या है ? : sitopaladi churna kya hota hai
  • सितोपलादि चूर्ण की सामग्री : sitopaladi churna ki samagri
  • सितोपलादि चूर्ण सेवन की मात्रा और अनुपान : sitopaladi churna kaise khaye
  • सितोपलादि चूर्ण के फायदे ,गुण और उपयोग : sitopaladi churna ke fayde gun aur upyog
  • सितोपलादि चूर्ण के नुकसान : sitopaladi churna ke nuksan
  • सितोपलादि चूर्ण क्या है ? : sitopaladi churna kya hota hai

सितोपलादि चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है जो कफ-खांसी और जुकाम जैसे रोगों को दूर कर पाचन व प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है |

सितोपलादि चूर्ण की सामग्री : sitopaladi churna ki samagri

सितोपलादि चूर्ण बनाने के लिए निम्न पाँच चीजों को समुचित मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बनाते हैं

✦ 100 ग्राम – वंशलोचन
✦ 200 ग्राम – मिश्री
✦ 50 ग्राम – पीपल
✦ 25 ग्राम – छोटी इलायची
✦ 15 ग्राम – दालचीनी

सितोपलादि चूर्ण सेवन की मात्रा और अनुपान : sitopaladi churna kaise khaye

2 ग्रा. सितोपलादि चूर्ण को 1 चम्मच शहद में मिलाकर दें।

सितोपलादि चूर्ण के फायदे ,गुण और उपयोग : sitopaladi churna ke fayde gun aur upyog

  • इस चूर्ण के सेवन से श्वास, खाँसी, क्षय, हाथ और पैरों की जलन, अग्निमान्द्य, जिव्हा की शून्यता, पसली का दर्द, अरुचि, ज्वर और उर्ध्वगत रक्तपित्त शांत हो जाता है।
  • यह चूर्ण बढ़े हुए पित्त को शान्त करता, कफ को छाँटता, अन्न पर रुचि उत्पन्न करता, जठराग्नि को तेज करता और पाचक रस को उत्तेजित कर भोजन पचाता है।
  • पित्तवृद्धि के कारण कफ सूख कर छाती में बैठ गया हो, प्यास ज्यादा, हाथ, पाँव और शरीर में जलन हो, खाने की इच्छा न हो, मुँह में खुन गिरना, साथ-साथ थोड़ा-थोड़ा ज्वर रहना (यह ज्वर । विशेषकर रात में बढ़ता है), ज्वर रहने के कारण शरीर निर्बल और दुर्बल तथा कांतिहीन हो जाना आदि उपद्रवों में इस चूर्ण का उपयोग किया जाता है, और इससे काफी लाभ भी होता है।
  • बच्चों के सूखा रोग में जब बच्चा कमजोर और निर्बल हो जाय, साथ-साथ थोड़ा ज्वर भी बना रहे, श्वास या खाँसी भी हो, तो इस चूर्ण के साथ प्रवाल भस्म और स्वर्ण मालती बसन्त की थोड़ी मात्रा मिलाकर प्रात:सायं सेवन करने से अपूर्व लाभ होता है।
  • हाथ व पैरों के तलवों में होने वाली जलन में प्रात: सायं सेवन करने से लाभ होता है।
  • बिगड़े हुए जुकाम में भी इस चूर्ण का उपयोग किया जाता है। अधिक सर्दी लगने, शीतल जल अथवा असमय में जल पीने से जुकाम हो गया हो। कभी-कभी यह जुकाम रूक भी जाता है। इसका कारण यह है कि जुकाम होते ही यदि सर्दी रोकने के लिए शीघ्र ही उपाय किया जाय, तो कफ सूख जाता है, परिणाम यह होता है कि सिर में दर्द, सूखी खाँसी, देह में थकावट, आलस्य और देह भारी मालूम पड़ना, सिर भारी, अन्न में रुचि रहते हुए भी खाने की इच्छा न होना आदि उपद्रव होते हैं। ऐसी स्थिति में इस चूर्ण को शर्बत बनप्सा के साथ देने से बहुत लाभ होता है, क्योंकि यह रुके हुए दुषित कफ को पिघला कर बाहर निकाल देता है और इससे होने वाले उपद्रवों को भी दूर कर देता है।


सितोपलादि चूर्ण के नुकसान : sitopaladi churna ke nuksan
इसमें अधिक मात्र में मिश्री होने के कारण यह मधुमेह के रोगियों के अनुकूल नहीं है इसका सेवन लगातार एक वर्ष तक ना करें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार चूर्ण का सेवन करना चाहिए ।

सितोपलादि चूर्ण के लाभ Benefits of Sitopladi Churna

Sitopladi Churna एक ऐसी आयुर्वेदिक दवा है जिसका उपयोग अनेक रोगों में किया जाता है ।

खांसी में फायदेमंद है  सितोपलादि चूर्ण Sitopaladi Churna benefits in Cough

  • सितोपलादि चूर्ण में दालचीनी, छोटी इलायची, वंशलोचन, मिश्री एवं पीपल जैसी देसी जड़ी बूटियां प्रयोग की जाती है । जिस कारण सितोपलादि चूर्ण में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण आ जाते हैं ।
  • सितोपलादि चूर्ण किसी भी प्रकार की खांसी को दूर करने में लाभदायक सिद्ध होता है । यदि किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान खांसी कि शिकायत हो तो ऐसे में Sitopladi Churna का प्रयोग कराया जा सकता है ।
  • सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग करने से बार बार खांसी का उठना, छाती में दर्द होना, जकड़न होना एवं कफ से संबंधित बुखार में भी आराम मिलता है ।


गले की खराश में 
Sitopladi Churna Benefits in Throat Infection

सितोपलादि चूर्ण यदि गले में खराश की समस्या हो एवं दर्द भी हो रहा हो तो सितोपलादि चूर्ण के साथ गंधक रसायन, यशद भस्म एवं प्रवाल पिष्टी का प्रयोग कराया जा सकता है । लेकिन ध्यान रखें, गंधक रसायन का प्रयोग करने से पहले किसी अनुभवी एवं योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य करें ।

सितोपलादि चूर्ण के प्रभाव से गले का किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन दूर हो जाता है, क्योंकि सितोपलादि चूर्ण में एंटीमाइक्रोबॉयल तथा एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं  ।इसलिए गले की खराश में इस चूर्ण का प्रयोग किया जा सकता है ।

टॉन्सिल में लाभ पहुंचाता है सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Tonsils

यदि गले में टॉन्सिल हो गए हो तथा कुछ खाते पीते समय गले में बहुत ज्यादा दर्द होता हो तो ऐसी स्थिति में भी सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग गंधक रसायन, प्रवाल पिष्टी, यशद भस्म एवं लोकनाथ रस के साथ कराया जा सकता है ।

इस दवा के प्रयोग से टॉन्सिल पैदा करने वाले हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं तथा व्यक्ति का गला बहुत ही कम समय में बिल्कुल ठीक हो जाता है ।

टी बी में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in tuberculosis

सितोपलादि चूर्ण तपेदिक जैसी घातक बीमारी में बहुत अधिक लाभदायक होता है । तपेदिक बीमारी टीवी का ही एक प्रारंभिक रूप मानी जाती है ।
इस बीमारी में व्यक्ति को बहुत जल्दी थकान हो जाती हैं, भूख बहुत कम लगती है, रात्रि के समय पसीना बहुत अधिक आता है तथा व्यक्ति बार-बार खासता है ।जिस कारण व्यक्ति के फेफड़ों में बहुत ज्यादा दर्द बना रहता है ।
तपेदिक रोग माइकोबैक्टेरियम नमक रोगाणु के कारण होता है । सितोपलादि चूर्ण इन बैक्टीरिया को तुरंत नष्ट कर देता है । यदि तपेदिक बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में सितोपलादि चूर्ण का सही अनुपान में सेवन कराया जाए तो तपेदिक बीमारी ठीक हो जाती है ।
सितोपलादि चूर्ण शरीर में बुखार पैदा करने वाले खतरनाक विषाणु एवं जीवाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है । इस चूर्ण के सेवन करने से खांसी के साथ-साथ कफ के कारण पैदा हुआ बुखार भी दूर हो जाता है ।
साथ ही अनेक छोटे-मोटे लक्षण जैसे थकान होना, भूख ना लगना एवं शरीर कमजोरी दूर हो जाती है, और व्यक्ति अपने आप को काफी स्वस्थ और एक्टिव महसूस करता है ।

साइनस में काफ़ी लाभदायक है सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Sinus

सितोपलादि चूर्ण साइनस जैसी बीमारी में लाभकारी होता है । साइनस में व्यक्ति को बहुत ज्यादा जुखाम रहता है, जुकाम तथा एलर्जी रहती है तथा नाक के आसपास सूजन आ जाती है । इस स्थिति में सितोपलादि चूर्ण का लाभ कराने से बहुत जल्दी आराम मिलता है ।

अस्थमा में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Asthma

सितोपलादि चूर्ण अस्थमा जैसी बीमारी के लिए एक रामबाण औषधि है । यदि हम यह कहें कि सितोपलादि चूर्ण अस्थमा के लिए एक विशेष ओषधि होती है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा ।

सितोपलादि चूर्ण में ऐसी जड़ी बूटियां डाली जाती हैं जो हमारे फेफड़ों तथा श्वसन तंत्र को बहुत ज्यादा मजबूती एवं ऊर्जा प्रदान करती हैं । अस्थमा श्वसन तंत्र की ही एक बीमारी है जिसमें व्यक्ति के फेफड़े कमजोर हो जाते हैं तथा व्यक्ति को सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत महसूस होती है ।

थोड़ा सा चलने फिरने में ही सांस फूल जाता है और दिल घबराने लगता है । ऐसी स्थिति में सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग करने से बहुत ज्यादा आराम मिलता है, क्योंकि सितोपलादि चूर्ण फेफड़ों को नई ऊर्जा प्रदान करता है ।

शुगर में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Diabetes

सितोपलादि चूर्ण मधुमेह रोग की विशेष दवा है । सितोपलादि चूर्ण का यदि सही विधि के साथ सेवन किया जाए तो यह शरीर से ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करता है ।

सितोपलादि चूर्ण रक्त में मौजूद स्टार्ट एवं शर्करा को कंट्रोल करता है । सितोपलादि चूर्ण के सेवन से पोस्ट हाइपोग्लाइसीमिया कंट्रोल रहता है जिस कारण मधुमेह यानी डायबिटीज में काफी आराम मिलता है ।

एनीमिया में लाभकारी सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna benefits in Anemia

हमारे शरीर में आयरन की कमी हो जाए तो आयरन की कमी से एनीमिया रोग हो जाता है । जिस कारण आंखों के सामने अंधेरा छाना, भूख ना लगना, थकावट महसूस करना तथा शारीरिक कमजोरी महसूस करना जैसी समस्याएं महसूस होती है ।

दालचीनी, भृंगराज, अदरक के साथ-साथ हमारे शरीर के लिए आवश्यक खनिज पदार्थ जैसे कि तांबा तथा चांदी इत्यादि पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं । जिस कारण सितोपलादि चूर्ण एनीमिया जैसी बीमारी से लड़ने में मददगार सिद्ध होता है ।

एलर्जी दूर करता है सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Allergy

सितोपलादि चूर्ण श्वसन तंत्र की एलर्जी को तो दूर करता ही है साथ ही यह नाक से संबंधित हर प्रकार की एलर्जी को भी दूर करने में सहायक होता है । सितोपलादि चूर्ण के सही अनुपान में सेवन करने से नाक में खाज होकर छींक आना, आंखों से पानी आना, नजला जुखाम रहना, गले में खराश होना आदि संक्रमण में लाभ मिलता है ।

पाचन तंत्र ठीक रखता है  सितोपलादि चूर्ण Sitopladi Churna Benefits in Digestive System

सितोपलादि चूर्ण में जो जड़ी बूटियां प्रयोग की जाती हैं वे हमारे श्वसन तंत्र को तो लाभ पहुंचाती ही हैं साथ ही हमारे पाचन तंत्र को अर्थात हमारे मैटो मेटाबॉलिज्म को भी स्वस्थ रखने में सहायक सिद्ध होती हैं । सितोपलादि चूर्ण के नियमित सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं तथा हमारा मेटाबॉलिज्म स्वस्थ रहता है ।

माइग्रेन दूर करने में सहयोगी  Sitopladi Churna Benefits in Migraine

सितोपलादि चूर्ण माइग्रेन को दूर करने में सहायक सिद्ध होता है । माइग्रेन एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति को आधे सिर में या पूरे सिर में दर्द होता है । दर्द की तीव्रता बहुत तेज होती है तथा यह दर्द 4 से 5 घंटे तक लगातार बना रहता है ।

ज्यादातर यह दर्द दोपहर को 2:00 से 5:00 के बीच होता है । माइग्रेन में सितोपलादि चूर्ण को प्रयोग करने से काफी लाभ मिलता है । माइग्रेन की समस्या में सितोपलादि चूर्ण के साथ साथ शिरः शुलादी वज्र रस तथा अन्य दवाइयां भी प्रयोग की जा सकती हैं

सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग कैसे करें How to use Sitopladi Churna

सितोपलादि चूर्ण को अलग-अलग बीमारियों में सेवन करने की विधि, मात्रा एवं अनुपान अलग-अलग होता है । आइए अब हम बात करते हैं कि अलग-अलग बीमारियों में सितोपलादि चूर्ण को किस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है, ताकि आपको सितोपलादि चूर्ण का पूरा लाभ मिल सके ।

बुखार में सितोपलादि चूर्ण को लेने कि विधि How to use Sitopladi Churna in Feve ?

बुखार में सितोपलादि चूर्ण को इस प्रकार लिया जा सकता है । 2 ग्राम सितोपलादि चूर्ण, 1 ग्राम शहद, 250 मिलीग्राम प्रवाल पिष्टी तथा 25 मिलीग्राम यशद भस्म । इन चारों को मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से बुखार में लाभ मिलता है । उपरोक्त खुराक एक समय की है ।

सूखी खांसी में सितोपलादि चूर्ण को लेने की विधि How to use Sitopladi Churna in Dry Cough

सूखी खांसी के लिए सितोपलादि चूर्ण को इस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है । 5 ग्राम सितोपलादि चूर्ण, 2.5 ग्राम शहद । दोनों को मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से सूखी खांसी में लाभ मिलता है ।

कफ में सितोपलादि चूर्ण को लेने की विधि How to use Sitopladi Churna in Cough

5 ग्राम सितोपलादि चूर्ण तथा 5 ग्राम शहद में मिलकर सुबह शाम चाटें ।  साथ में दूध का सेवन करने से कफ में लाभ मिलता है

4 comments:

  1. Kya Sach me es se astma thik ho jata hai

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    1. जी! इसका सेवन करने से अस्थमा में काफी आराम मिलता है

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